Thursday, 16 March 2023

19 मार्च को ब्राह्मण समाज करेगा शक्ति प्रदर्शन, जयपुर में होगी ब्राह्मण महापंचायत

  चुनावी साल में अलग अलग समाज अपनी एकता का प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करने में जुट गए हैं। हाल ही में जयपुर में जाट महाकुंभ का आयोजन हुआ था। अब 19 मार्च को जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में ब्राह्मण महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। ब्राह्मण समाज की मांग है कि राजनीतिक पार्टियों में स्वर्ण जातियों को कोई विशेष आरक्षण नहीं दिया जा रहा जबकि अन्य समाजों के लिए आरक्षण कोटा तय कर रखा है। ब्राह्मण समाज अब अपनी ताकत दिखाएगा और राजनीतिक पार्टियों से उचित प्रतिनिधित्व की मांग करेगा। इस महापंचायत में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए 2000 किलो पीले चावल बांटकर न्योता दिया जा रहा है।


ब्रह्म शक्ति संघ के राष्ट्रीय संयोजक सुनील मुद्गल का कहना है कि राजनीतिक दलों में स्वर्ण जातियों की लगातार उपेक्षा होती रही है। ओबीसी, एसी और एसटी के लिए अलग अलग प्रकोष्ठ बने हुए जबकि स्वर्ण जातियों के लिए कोई प्रकोष्ठ आज तक नहीं बना है। प्रदेश में 85 लाख से ज्यादा आबादी है। प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर स्वर्ण वर्ग का प्रभाव है। इसके बावजूद भी उन्हें राजनैतिक हाशिये पर खड़ा कर दिया गया है। चुनावों के समय टिकट वितरण की बात हो या राजनैतिक नियुक्तियों का मामला हो, स्वर्ण वर्ग हमेश वंचित रह जाता है। ऐसे ब्रह्म शक्ति संघ यह मांग करता है कि स्वर्ण जातियों के लिए भी राजनैतिक पार्टियां स्थान सुनिश्चित करें।

युवाओं के लिए होगा मोटिवेशनल सेमीनार

ब्रह्म शक्ति संघ की ओर से स्वर्ण समाज के युवाओं के लिए मोटिवेशनल सेमीनार का आयोजन किया जाएगा। गांव-गांव ढाणी-ढाणी जाकर एमएसएमई के तहत रोजगार मेले लगाए जाएंगे ताकि स्वर्ण समाज के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा सके। नेशनल लेवल की कंपनियों की ओर से रोजगार मेले लगवाए जाएंगे ताकि समाज के युवा व्यापार की बारीकियां सीख सके और वे आत्मनिर्भर बन सके। आर्थिक रूप से मजबूत होकर ही युवा समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगे। युवा प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष सर्वेश्वर शर्मा का कहना है कि प्रदेश सरकार को ब्राह्मण आरक्षण आन्दोलन के प्रणेता विप्र शिरोमणी पंडित भंवरलाल शर्मा के नाम पर सरदार शहर एवं स्वर्गीय पंडित श्याम सुन्दर वशिष्ठ के नाम पर जयपुर में मार्गों का नामकरण किया जाए।

sources from: navbharattimes

Saturday, 9 May 2020

खण्डेलवाल ब्राह्मण की कुलदेवी

जैसा कि आपको विदित है हमारे खाण्डल समाज के उद्गम स्थल लोहार्गल में आप सभी समाज बन्धुओं के सहयोग से एक विशाल भव्य भवन का निर्माण कराया जा रहा है , जिसमें हमारे समाज के पूर्वज ऋषियों की प्रतिमाएँ एवं कुल देवियों के मंदिर स्थापित किये जायेंगे । हमें समाज बन्धुओं से हमारे समाज की निम्नलिखित कुल देवियों होने की जानकारी मिली है । इनके अतिरिक्त अन्य कोई हो तो कृपया प्रमाण सहित जानकारी से अवगत करावे ताकि तदानुसार आवश्यक संशोधन किया जा सके । कुल देवियों एवं गौत्रों के नाम निम्न प्रकार है !




1 . झाड़ली माता ( नाथकी माता )                    पीपलवा , गोधला . मछवाल
2 . शाकम्भरी माता                                        भूरटिया , भाटीवाड़ा , मंगलहारा , सोती लढाणिया , झुन्झुनोदिया
3 . अन्नपूर्णा माता                                          बील , निढाणिया , कुंजावड़ा , मण्डगिरा
4. सुभद्रा माता                                              सिंहोटा , गुंजावड़ा , तिवाड़ी , सोमला
5 . महरमाता                                                चामुण्डा माता नवहाल , डीडवाणिया , गोरसिया , जोशी , परवाल
6 . समराय माता                                           सुन्दरिया
7. भुआल माता ( मनसा माता )                      काछवाल
8. जमवाय माता ( अम्बा माता )                     रिणवा , गोवला . बोचीवाल
9.  जीण माता                                              बढाढरा , चोटिया , पाराशर
10 . चन्द्रिका माता ( विशाला माता )              बणसिया , बाटोलिया
11 . नौयणी माता / पहाड़ी माता                    भुरभुरा , रूथला
12 . महागौरी माता                                      बंसीवाल , हुचरिया
13 . बंधुमाता                                              झकनाडिया , अजमेरिया
14 . शेमप्रभा माता / विघ्नेश्वरी माता               सेवदा , सांभरा , सोडवा , बीलवाल . दुगोलिया
15 . साडला माता / दुर्गा माता                      माटोलिया , शाकुनिया

खण्डेलवाल ब्राह्मण

जगद् का गौरवशाली स्थान प्राप्त करनेवाली भारतीय ब्राह्मण जातियों में
खाण्डलविप्र खण्डेलवाल ब्राह्मण जाति का भी प्रमुख स्थान है । जिस प्रकार
अन्य ब्राह्मण जातियों का महत्व विशॆष रूप से इतिहास प्रसिद्ध है, उसी
प्रकार खाण्डलविप्र खण्डेलवाल ब्राह्मण जाति का महत्व भी इतिहास प्रसिद्ध
है । इस जाति में भी अनेक ऋषि मुनि, विद्वान् संत, महन्त, धार्मिक, धनवान,
कलाकार, राजनीतिज्ञ और समृद्धिशाली महापुरूषों ने जन्म लिया है ।
खाण्डलविप्र जाति में उत्पन्न अनेक महापुरूषों ने समय समय पर देश, जाति,
धर्म, समाज और राष्ट के राजनैतिक क्षेत्रो को अपने प्रभाव से प्रभावित किया
है । जिस प्रकार अन्य ब्राह्मण जातियों का अतीत गौरवशाली है, उसी प्रकार
इस जाति का अतीत भी गौरवशाली होने के साथ साथ परम प्रेरणाप्रद है ।
जिन जातियों का अतीत प्रेरणाप्रद गौरवशाली और वर्तमान कर्मनिष्ठ होते है वे
ही जातियां अपने भविष्य को समुज्ज्वल बना सकती है । खाण्डलविप्र जाति में
उपर्युक्त दोनो ही बाते विद्यमान हैं । उसका अतीत गौरवशाली है । वर्तमान को
देखते हुए भविष्य भी नितान्त समुज्ज्वल है । ऐसी अवस्था में उसके इतिहास
और विशॆषकर प्रारंभिक इतिहास पर कुछ प्रकाश डालना अनुचित न होगा ।
खाण्डलविप्र जाति की उत्पत्ति विषयक गाथाओं में ऐतिहासिक तथ्य सम्पुर्ण रूप
से विद्यमान है । इस जाति के उत्पत्तिक्रम में जनश्रुति और किंवदन्तियों
की भरमार नहीं है । उत्पत्ति के बाद ऐतिहासिक पहलूओं के विषय में जहाँ
जनश्रुति और किंवदन्तियों को आधार माना गया है, वह दूसरी बात है । उत्पत्ति
का उल्लेख कल्पना के आधार पर नहीं हो सकता । याज्ञवल्क्य की कथा को प्रमुख
मानकर खाण्डलविप्र जाति का उत्पत्तिक्रम उस पर आधारित नहीं किया जा सकता ।
महर्षि याज्ञवल्क्य का जन्म खाण्डलविप्र जाति में हुआ था । याज्ञवल्क्य का
उींव खाण्डलविप्र जाति के निर्माण के बाद हुआ था । याज्ञवल्क्य
खाण्डलविप्र जाति के प्रवर्तक मधुछन्दादि ऋषियों में प्रमुख देवरात ऋषि के
पुत्र थे ।

खाण्डलविप्र जाति का नामकरण एक धटना विशोष के आधार पर हुआ था । वह विशॆष
धटना लोहार्गल में सम्पन्न परशुराम के यज्ञ की थी, जिसमें खाण्डलविप्र जाति
के प्रवर्तक मधुछन्दादि ऋषियों ने यज्ञ की सुवर्णमयी वेदी के खण्ड दक्षिणा
रूप में ग्रहण किये थे । उन खण्डों के ग्रहण के कारण ही, खण्डं लाति
गृहातीति खाण्डल: इस व्युत्पति के अनुसार उन ऋषियों का नाम खण्डल अथवा
खाण्डल पडा था । ब्राह्मण वंशज वे ऋषि खाण्डलविप्र जाति के प्रवर्तक हुए ।

Thursday, 23 January 2020

भगवान परशुराम

परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) के एक ब्राह्मण थे। उन्हें विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है[1]। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत मैं हुआ था। (म.प्र) के इंदौर जिला मै हुआ था। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार थे। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम, जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से सारंग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ। तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक परशु प्राप्त किया। शिवजी से उन्हें श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया।


वे शस्त्रविद्या के महान गुरु थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण व कर्ण को शस्त्रविद्या प्रदान की थी। उन्होंने एकादश छन्दयुक्त "शिव पंचत्वारिंशनाम स्तोत्र" भी लिखा। इच्छित फल-प्रदाता परशुराम गायत्री है-"ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि, तन्नोपरशुराम: प्रचोदयात्।" वे पुरुषों के लिये आजीवन एक पत्नीव्रत के पक्षधर थे। उन्होंने अत्रि की पत्नी अनसूया, अगस्त्य की पत्नी लोपामुद्रा व अपने प्रिय शिष्य अकृतवण के सहयोग से विराट नारी-जागृति-अभियान का संचालन भी किया था। अवशेष कार्यो में कल्कि अवतार होने पर उनका गुरुपद ग्रहण कर उन्हें शस्त्रविद्या प्रदान करना भी बताया गया है।

sources from wikipedia

Thursday, 16 May 2019

श्री खाण्डल विप्र शैक्षणिक संस्थान एवं छात्रावास

समाज के 100 से अधिक गणमान्य स्वजनों की उपस्थिति में दिनांक 25 जुलाई, 1994 को श्री नवजीवन रसायन शाला रामगंज बाजार जयपुर में एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि समाज के निर्धन एवं प्रतिभाशाली छात्रों को जो सुदूर गांवों में रहते है। उच्च अध्ययन हेतु राजधानी में आने पर आवास एवं भोजन की समस्याओं के साथ मार्ग निर्देशन के अभाव से ग्रस्त है। इसी संवेदना को लेकर श्री खाण्डल विप्र सेवा संस्थान का इसी दिन जन्म हुआ जिसकी स्थापना का एक मात्र लक्ष्य प्रतिभाशाली छात्रों को न्यूनतम शुल्क पर आवास भोजन एवं लक्ष्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के मार्ग निर्देशन हेतु एक शैक्षणिक संस्थान एवं छात्रावास भवन का निर्माण करना है। चार वर्ष के अर्थक परिश्रम एवं अपने राजकीय सम्यकों का श्रेष्ठ उपयोग कर सेवा संस्थान में दिनांक 7 मई 1998 को 2275 वर्ग मीटर का भूखण्ड राजस्थान विश्वविद्यालय के समीप झालाना संस्थाकन क्षेत्र जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा मात्र 16 लाख 58 हजार रूपये में आवंटित करवा कर कब्जा प्राप्त किया। सन 1998 की परशुराम जयन्ती अक्षया तृतीया के दिन इस भवन का भूमि पूजन के साथ ही निर्माण का श्रीगणेश हुआ। जिससे समाज के 200 से अधिक गणमान्य सज्जान उपस्थित थे। सनृ 1998 की दीपावली के स्नेह मिलन के अवसर पर निर्माणाधाीन भवन के प्रांगण में 300 सदस्यों की स्नेह सभा में विचार विमर्श कर श्री खाण्डल विप्र सेवा संस्थान में सर्व सम्मति से भूमि को भवन के निर्माण एवं विकास के लिये श्री खाण्डल विप्र सेवा संस्थान का गठन कर उसे सौंप दिया श्री खाण्डल विप्र सेवा संस्थान ट्रस्ट के प्रथम अध्यक्ष के रूप में श्री बनवारी लाल जोशी, नई दिल्ली के प्रथम कार्यकाल में ही भवन का निर्माण एक करोड़ रूपये के वृहद लक्ष्य के साथ अक्टूबर 2000 की दिवाली से पहले पूरा कर छात्रावास का प्रारम्भ किया गया।
 
पुनः ट्रस्ट के द्वितीय कार्यकाल में श्री मदन लाल जी बणसिया अध्यक्ष के रूप में पदासीन हुये और छात्रावास में छात्रों की अधिकता को देखते हुये तीसरी मंजिल का कार्य 2003 के जून माह में पूरा किया गया और पूरे निर्माण एवं विकास कार्य में समाज के उदार दान दाताओं ने एक करोड़ रूपये का अभूतपूर्व योगदान मात्र चार वर्ष में पूरा कर एक कीर्तिमान स्थापित किया उल्लेखनीय बात यह है कि एक करोड़ रूपये के निर्माण लक्ष्य को पूरा करने के साथ ही महिला छात्रावास की आवश्यकता का अनुभव किया गया एवं मात्र दो माह के अल्प काल में पुनः जयपुर विकास प्राधिकरण से अपने उद्देश्यों की पूर्ति में सफल रहने के कारण संस्थान भवन के नैऋत्य कोण में 752 वर्ग मीटर का भूखण्ड जो 2002 में आवंटित करवाया गया इस पर 50 लाख की लागत महिला छात्रावास का प्रारम्भ देवोत्थान एकादशी 2003 को क्रियान्वित पूजन एवं संत समागम के साथ उत्साह पूर्वक किया गया। इन दोनों परियोजनाओं में पाँच वर्ष के अतंराल में एक करोड़ 50 लाख रूपये की दान राशि का प्राप्त होना समाज की नीति परायणता एवं श्रेष्ठ कार्यों के लिये शिक्षा के विकास में अपना उदार योगदान का श्रेष्ठ उदाहरण है।
 
संस्थान भवन में 111 आवासीय छात्रों के लिये तथा 50 छात्राओं के लिये सुविधा महिला छात्रावास में अपनी पूरी क्षमता के साथ शिक्षा के उत्थान हेतु प्रयासरत है। इन दोनों छात्रावासों में पूर्व कालिक निदेशक, दो पृथक छात्रावास अधीक्षक तथा दोनों छात्रावासों में पृथक-पृथक 8 कम्प्यूटर जिन पर असीमित इन्टरनेट की सुविधा है। पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष, सभा कक्ष, भोजनालय, अतिथि कक्ष, कार्यालय कक्ष, चौबीस घंटे सुरक्षा प्रहरी की व्यवस्था, नल के पानी की व्यवस्था एवं विशाल हरे भरे बगीचे वृक्षों से सुशोभित है। खाण्डल विप्र सेवा संस्थान ट्रस्ट द्वारा संचालित पुरूष एवं महिला छात्रावासों में विद्वान विशेषज्ञों की निःशुल्क सेवायें मार्ग दर्शन हेतु मार्ग निर्देशन एवं भविष्य निर्माण हेतु उपलब्ध है। संस्थान समाज के प्रबुद्ध वर्ग एवं उदार व्यवसायी वर्ग के समाज हित में आपसी तालमेल का सुन्दर उदाहरण है।
 
छात्रावास संचालन हेतु अग्रिम पृष्ठ पर दी गई सूची के अनुसार ट्रस्ट का निर्माण किया गया है इसमें पूरे देश से अपने अपने क्षेत्रों से मूर्घन्य विद्वान प्रोफेसर, डाक्टर, वकील, सी.ए., प्रशासनिक सेवा वर्ग के उच्च पदस्थ  अधिकारी इजिनियंर एवं सफल उदार उद्यमी प्रतिभाओं को शामिल किया गया है। यह वर्ग की बात है कि सभी ट्रस्टी गण सुन्दर आपसी तालमेल के साथ संस्थान के समाज में विकास के लिए प्रयत्नशील है। 


ADDRESS AND CONTACT 
Shree Khandal Educational Institute & Hostel
J-3A, Jhalana Institutional Area, Jaipur- 302004, Rajasthan - India
Ph.: 0141-2701154
email: sevasansthanjpr@gmail.com & info@sevasansthan.com 

Sources from : 

Friday, 10 March 2017

भगवान परशुराम रथ यात्रा

सभी ब्राह्मण बंधुओं से निवेदन है कि भगवान परशुराम रथ यात्रा  रथ यात्रा संपूर्ण भारतवर्ष में जाएगी आप सभी बंधु सादर आमंत्रित हैं |

post by :- BANWARI SHARMA

Monday, 26 December 2016

रक्तदान जीवनदान है ( Donate blood and save life )

रक्तदान  जीवनदान है। हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियों को बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं।

अनायास दुर्घटना या बीमारी का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है। आज हम सभी शिक्षि‍त व सभ्य समाज के नागरिक है, जो केवल अपनी नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के के लिए भी सोचते हैं तो क्यों नहीं हम रक्तदान के पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान करें और लोगों को जीवनदान दें।